शिमला — मीनाक्षी (वरिष्ठ पत्रकार, पंजाब दस्तक)
सरदार पटेल विश्वविद्यालय (एसपीयू) मंडी में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के राज्य सचिव और राज्य कमेटी सदस्य पर हुए कथित हमले के विरोध में एसएफआई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी और एसएफआई शिमला नगर कमेटी ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को डीसी कार्यालय शिमला के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के माध्यम से छात्र नेताओं पर हुए हमले के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त करते हुए पुलिस प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई गई।
क्या है पूरा मामला?
एसएफआई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी द्वारा जारी बयान के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को एसपीयू मंडी परिसर में एसएफआई के राज्य सचिव कामरेड सन सेक्टा और राज्य कमेटी सदस्य कामरेड रितविक पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े कार्यकर्ताओं द्वारा हमला किया गया था।
संगठन का कहना है कि दोनों छात्र नेता विश्वविद्यालय प्रशासन से मिलने जा रहे थे, तभी उन पर यह हमला किया गया। एसएफआई ने इसे बेहद शर्मनाक और कायरतापूर्ण कृत्य करार देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल कर छात्रों के मुद्दे उठाने जा रहे नेताओं पर इस तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

”हिंसा के जरिए आवाज दबाने की कोशिश”
विरोध प्रदर्शन के दौरान एसएफआई हिमाचल प्रदेश राज्य अध्यक्ष कामरेड अनिल ठाकुर ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा:
”दो निहत्थे छात्र नेताओं पर हमला करना एबीवीपी की राजनीतिक असहिष्णुता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी अवमानना को उजागर करता है। जब छात्र संगठनों के पास अपने विचार रखने और राजनीतिक बहस करने का अवसर होता है, तब हिंसा का सहारा लेना यह दिखाता है कि असहमति का जवाब तर्क से देने के बजाय विरोध की आवाज को डराकर दबाने की कोशिश की जा रही है।”
एसएफआई ने आरोप लगाया कि परिसरों में भय का माहौल पैदा करने और छात्र संगठनों की स्वतंत्र गतिविधियों को निशाना बनाने की ऐसी प्रवृत्तियों को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। संगठन ने कहा कि देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में सामने आई इस तरह की गंभीर घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि शैक्षणिक संस्थानों में लगातार लोकतांत्रिक ताने-बाने को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
एसएफआई ने देश के अन्य विश्वविद्यालयों के उदाहरण देते हुए उल्लेख किया कि:
फरवरी 2025 में दिल्ली स्थित साउथ एशियन यूनिवर्सिटी (SAU) में भोजन की पसंद को लेकर हुए विवाद के दौरान एबीवीपी के समर्थकों द्वारा छात्रों के साथ मारपीट और एक छात्र के साथ धक्का-मुक्की के आरोप लगे तथा मेस स्टाफ को भी निशाना बनाया गया।
फरवरी 2026 में बेंगलुरु की अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर परिसर में घुसकर तोड़फोड़ करने तथा सुरक्षा गार्ड और छात्रों के साथ मारपीट करने के गंभीर आरोप सामने आए।
एसएफआई ने इन तमाम घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों में इस तरह की फासीवादी और उपद्रवी प्रवृत्तियों का बढ़ना देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक बड़ा खतरा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द से जल्द दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो इस आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।
देखते रहें पंजाब दस्तक।
