बिलासपुर के चिल्ट गांव में बच्चे पर पालतू कुत्ते के हमले से जुड़ी घटना

कोट कहलूर के चिल्ट में पालतू श्वान ने मासूम को नोचा: ग्रामीणों में भारी आक्रोश, मालिक पर केस दर्ज

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​आक्रामक श्वान को खुला छोड़ना पड़ा भारी; सहमे लोग पूछ रहे—’आखिर कब तक और क्यों?’


वरिष्ठ पत्रकार: प्रियंका (पंजाब दस्तक)
​​बिलासपुर:कोट कहलूर थाना क्षेत्र के तहत चिल्ट गांव में पालतू जानवर की घोर लापरवाही का रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक घर में पाले गए आक्रामक श्वान ने अचानक हमला बोलकर मासूम बच्चे राहुल कुमार को बुरी तरह नोच डाला। अचानक हुए इस खूनी हमले में बच्चा गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसका लहूलुहान हालत में अस्पताल में उपचार चल रहा है।
​घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है। पालतू जानवरों को गलियों में खुला छोड़ने की बढ़ती मनमानी पर स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है।


​पिता की शिकायत पर पुलिस का एक्शन, मालिक पर संगीन धाराओं में केस
​मासूम के साथ हुई इस बर्बर घटना के बाद पीड़ित बच्चे के पिता राकेश कुमार (निवासी चिल्ट, डाकघर कनफारा, तहसील श्री नैना देवी जी) ने तुरंत कोट कहलूर थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज करवाई। मामले की नजाकत को भांपते हुए पुलिस ने फौरन एक्शन लिया और श्वान मालिक के खिलाफ संबंधित धाराओं में आपराधिक केस दर्ज कर कानूनी शिकंजा कस दिया है।


​एसपी बिलासपुर अभिषेक धीमान का बयान
​मामले की पुष्टि करते हुए पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान ने कहा:
​”पीड़ित पक्ष की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए श्वान मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। घटना की हर पहलू से गहन तफ्तीश की जा रही है। कानून के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे ताकि कोई भी व्यक्ति पालतू जानवरों को लेकर इस तरह की जानलेवा लापरवाही न बरते।”


​ग्राउंड रिपोर्ट: जनता का सीधा सवाल—’आखिर कब तक और क्यों?’
​इस दर्दनाक हादसे के बाद क्षेत्र के लोगों में भारी रोष है। ग्रामीण सीधे तौर पर प्रशासन और समाज से तीखे सवाल कर रहे हैं:
​आखिर कब तक सहेंगे यह खौफ?
इलाके के लोगों का कहना है कि जिस वक्त उस आक्रामक श्वान ने राहुल को अपने नुकीले दांतों से नोचा, उस अबोध बालक पर क्या बीती होगी? शारीरिक घाव भले भर जाएं, लेकिन उसके जेहन में बैठा खौफ जिंदगी भर नहीं मिटेगा। लोग पूछ रहे हैं कि ऐसे खौफनाक मंजर हमारे मासूम बच्चे कब तक झेलते रहेंगे?


​आखिर क्यों नहीं तय होती मालिकों की जवाबदेही?
ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि आक्रामक नस्ल के जानवर पालने वाले उन्हें बिना सुरक्षा पट्टे और मजल (मुंह की जाली) के सार्वजनिक रास्तों पर क्यों खुला छोड़ देते हैं? जब खतरा सबको दिखता है, तो पहले से कड़े नियम क्यों नहीं बनाए जाते?


​सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे कार्रवाई:
लोगों की मांग है कि बात सिर्फ एफआईआर और कागजी कार्रवाई तक नहीं सिमटनी चाहिए। धरातल पर कड़े नियम लागू हों, ताकि किसी और मासूम की जान पर बन न आए।


​आपकी राय क्या है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं
​इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? जो लोग अपने पालतू कुत्तों को इस तरह बिना सुरक्षा उपायों के खुला छोड़ देते हैं, उनके खिलाफ प्रशासन को क्या सख्त कार्रवाई करनी चाहिए? अपनी राय और सुझाव नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।
​देखते रहें ‘पंजाब दस्तक’ — सच की आवाज़

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