प्रियंका चौहान (पंजाब दस्तक), रोहड़ू
प्रदेश कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ने रोहड़ू में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अपनी गहरी नाराजगी और दर्द साझा किया है। किसी सार्वजनिक या औपचारिक मंच के बजाय सीधे ज़मीनी कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए प्रतिभा सिंह ने साफ कहा कि महज 20 पोस्टर-बैनर लगाकर औपचारिकता निभाने से संगठन नहीं चलता; असली बात ज़मीनी स्तर पर काम और इतिहास को सम्मान देने की होती है।
छह बार के मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की हो रही उपेक्षा पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की संकीर्ण सोच के चलते संगठन के निर्माता को ही बिसराया जा रहा है। बातचीत के दौरान उन्होंने कुछ पदाधिकारियों के रवैये पर भी सवाल उठाए कि किसी का भी नाम आगे कर सिर्फ दिखावटी औपचारिकताएं पूरी कर दी जाती हैं।
प्रतिभा सिंह ने भावुक लहजे में कार्यकर्ताओं से कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है और रोहड़ू की जनता को भी देखना चाहिए कि आज यहाँ क्या चल रहा है। स्वर्गीय वीरभद्र सिंह जी को गुजरे अभी मात्र चार-साढ़े चार साल का समय हुआ है। इतनी जल्दी हम उनका चेहरा और उनका स्मरण कैसे भूल सकते हैं? जब भी आप बैठकों, दौरों या चर्चाओं में जा रहे हैं, तो कम से कम यह जिक्र तो होना चाहिए कि उन्होंने इस क्षेत्र और पूरे प्रदेश के लिए क्या-क्या काम किए हैं। लोग आज भी उनके विकास को याद रखते हैं, और जब हम याद रखेंगे तभी तो हमारी आने वाली पीढ़ी सीख पाएगी।”
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें उन सभी कांग्रेस जनों से खुला गिला है, जो मुख्यमंत्री के साथ घूमते हैं मगर राजा साहब के योगदान पर चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस शख्सियत ने रोहड़ू को विकास के नक्शे पर स्थापित किया, उन्हें इतनी आसानी से कैसे भुलाया जा सकता है।
हिमाचल निर्माता का हवाला देते हुए प्रतिभा सिंह ने कहा, “हम जब भी नाहन या सिरमौर जाते हैं, तो बिना डॉ. यशवंत सिंह परमार का नाम लिए कोई बैठक या कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ता, क्योंकि वह हिमाचल के निर्माता थे। ठीक उसी तरह रोहड़ू और हिमाचल के लिए स्वर्गीय वीरभद्र सिंह का स्थान है। केवल बैनर-पोस्टर की दिखावटी राजनीति के बजाय संगठन को दिल से राजा साहब के दिखाए रास्ते पर चलना होगा और उनके मान-सम्मान की रक्षा करनी होगी।”
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