हिमाचल पेंशनर आंदोलन को लेकर सुरेश ठाकुर ने सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया

​पेंशनरों के हक पर खुली जंग: सीएम के सदन में दावों पर भड़की संघर्ष समिति, सुरेश ठाकुर का तीखा हमला—’सीआईडी रिपोर्ट देख लें सीएम, 15 दिन में वार्ता बुलाएं वरना आंदोलन को रहें तैयार’

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धर्मशाला से पंजाब दस्तक के लिए वरिष्ठ पत्रकार भेषज की एक्सक्लूसिव व तीखी बातचीत
​हिमाचल प्रदेश के लाखों पेंशनरों के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है। पेंशनरों की सबसे बुलंद आवाज माने जाने वाले हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने धर्मशाला की धरती से सुक्खू सरकार और पेंशनरों के नाम पर रोटियां सेकने वाले चंद ‘लेटरहेड नेताओं’ दोनों को एक साथ कटघरे में खड़ा कर दिया है।


​पंजाब दस्तक के वरिष्ठ पत्रकार भेषज के साथ हुई इस बेहद आक्रामक, सीधी और बेबाक बातचीत में सुरेश ठाकुर ने विधानसभा के मंच से बोले गए दावों की बखिया उधेड़ते हुए सरकार को 15 दिन का खुला अल्टीमेटम थमा दिया।
​भेषज (वरिष्ठ पत्रकार, पंजाब दस्तक): सुरेश जी, 3 सितंबर 2026 को विधानसभा में मुख्यमंत्री ने ताल ठोककर कहा कि 67 वर्ष से अधिक आयु वाले पेंशनरों की ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन और लीव इनकैशमेंट की देनदारियां चुका दी गई हैं। क्या यह सच है?


​सुरेश ठाकुर (तंजिया मुस्कान के साथ): भेषज जी, विधानसभा राजनीति चमकाने का अखाड़ा नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सबसे पवित्र मंदिर है। मंदिर की चौखट पर खड़े होकर कोई झूठ नहीं बोलता, इसलिए सदन के भीतर हर सवाल का जवाब शत-प्रतिशत सच और सटीक होना चाहिए। 3 सितंबर को विधायक दीप राम के मूल प्रश्न और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के पूरक सवालों पर मुख्यमंत्री जी ने जो दावा किया, वह पूरी तरह तथ्यहीन, सफेद झूठ और बुजुर्गों की भावनाओं से खिलवाड़ है।


​1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच रिटायर हुए 67 वर्ष से ऊपर के किसी एक भी पेंशनर के खाते में पूर्ण भुगतान नहीं आया है। अगर सरकार का दावा सच है, तो सीएम साहब वह आधिकारिक अधिसूचना और बैंक आंकड़े सार्वजनिक करें कि यह पैसा कब, किसे और कहां दिया गया? कागजी आंकड़ों से बुजुर्गों की दवाइयों का खर्च नहीं निकलता।


​भेषज: वित्त विभाग ने 18 अगस्त 2026 को भी 15% और 35% भुगतान की अधिसूचना निकाली थी, उस पर आपका क्या कहना है?
​सुरेश ठाकुर: वह केवल पेंशनरों की आंखों में धूल झोंकने जैसी खानापूर्ति थी। क्लास-1 और 2 को 15-15% और क्लास-3 को 35% आंशिक भुगतान का झुनझुना थमाकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती। पूरी उम्र प्रदेश को संवारने में खपाने वाले वरिष्ठ नागरिकों को उनकी ही खून-पसीने की कमाई किस्तों और तारीखों के चक्रव्यूह में उलझा कर दी जा रही है। पेंशनर अपना वाजिब हक मांग रहे हैं, किसी की खैरात नहीं।


​भेषज: कुछ लोग खुद को पेंशनरों का मसीहा बताकर लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं, उनके बारे में आपका क्या रुख है?
​सुरेश ठाकुर (हंसते हुए दो-टूक): भेषज जी, जिनका धरातल पर कोई वजूद नहीं, वे अखबारों में जिंदा रहने के लिए छटपटा रहे हैं। 10-12 लोगों का वही घिसा-पिटा टोला कभी शिमला के लोअर बाजार में चक्कर काटता है, तो कभी किसी बंद कमरे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को नेता घोषित कर देता है। उनके साथ 50 बुजुर्ग भी खड़े होने को तैयार नहीं हैं, जिनमें से भी पांच-सात केंद्र के रिटायर्ड लोग साथ बिठा रखे हैं। इस उम्र में आकर पेंशनरों के हकों पर ऐसी गंदी सियासत करते हुए उन्हें शर्म आनी चाहिए।
​पेंशनर समाज ऐसे स्वयंभू चेहरों का नाम तक सुनना पसंद नहीं करता। मुख्यमंत्री जी को भी समझ लेना चाहिए कि इन चापलूसों के पीछे भागने से मसले हल नहीं होंगे। इन तथाकथित नेताओं को भी अब शीशे में अपनी असलियत देख लेनी चाहिए—यह उम्र आपस में टांग खींचने की नहीं, बल्कि अपने हक के लिए एकजुट होने की है।


​भेषज: सरकार इस बात को कैसे समझेगी कि असली पेंशनर किसके साथ खड़ा है?
​सुरेश ठाकुर (पूरी आक्रामकता और आत्मविश्वास के साथ): सरकार बहुत अच्छे से जानती है, भेषज जी! धर्मशाला के जोरावर स्टेडियम के बाहर पेंशनरों का ऐतिहासिक हुजूम हो, शिमला के चौड़ा मैदान का चक्का जाम हो या विधानसभा के बाहर बुजुर्गों की गूंजती हुंकार—इन तीनों विशाल रैलियों ने साफ कर दिया है कि हिमाचल का असली पेंशनर किसके साथ चट्टान की तरह खड़ा है। मुख्यमंत्री महोदय ने खुद वीडियो देख लिए होंगे और उनकी सीआईडी (CID) के आला अफसरों ने भी पेंशनरों की एकजुटता की खुफिया रिपोर्ट टेबल पर रख दी होगी।


​भेषज: इस गतिरोध का अंतिम समाधान क्या है और संघर्ष समिति का अगला कदम क्या होगा?
​सुरेश ठाकुर (सख्त लहजे में): हम किसी पार्टी के विरोधी नहीं हैं। हम सरकार के साथ खुले मन से बातचीत के लिए तैयार हैं, क्योंकि मसले बातचीत की मेज पर ही सुलझते हैं। मुख्यमंत्री तुरंत पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के वास्तविक शीर्ष नेतृत्व को वार्ता के लिए बुलाएं और बकाये की पूर्ण अदायगी की समयबद्ध अधिसूचना जारी करें।


​हम सरकार को साफ शब्दों में 15 दिन का अल्टीमेटम देते हैं। यदि 15 दिन के भीतर संघर्ष समिति के साथ अधिकृत बैठक नहीं बुलाई गई, तो पूरे हिमाचल में ऐसा उग्र और ऐतिहासिक आंदोलन छेड़ा जाएगा जिसकी गूंज पूरे उत्तर भारत में सुनाई देगी। इसके बाद चक्का जाम हो या सड़कों पर संग्राम, बनने वाले हर हालात की सीधी और पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।
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