AIMTC ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और भारतीय ट्रांसपोर्टर

देश की 20 करोड़ जिंदगियों और पहियों की असली ताकत: जानिए क्या है AIMTC, जिसके एक फैसले से तय होती है सप्लाई चेन की रफ्तार

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​चंडीगढ़ न्यूज़ रूम से खास पड़ताल: सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ
​चंडीगढ़: देश की सड़कों पर दिन-रात दौड़ने वाले ट्रकों की गड़गड़ाहट और बसों के पहिए केवल मुसाफिर या सामान नहीं ढोते, बल्कि वे भारत की अर्थव्यवस्था की असली धड़कन चलाते हैं। जब भी इन पहियों के हक, सम्मान और सुरक्षा पर संकट के बादल मंडराते हैं, तो पूरे मुल्क में एक ही नाम चट्टान की तरह खड़ा नजर आता है—AIMTC (ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस)। कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक और पूर्वोत्तर से लेकर पंजाब-हरियाणा के बॉर्डर तक, ट्रांसपोर्टरों की यह वह शीर्ष संस्था है जिसकी मेज पर लिए गए फैसले देश की सप्लाई चेन की दिशा तय करते हैं।


​3,500 यूनियनों की एकजुटता, 1.45 करोड़ वाहनों की महा-शक्ति
​नई दिल्ली के आसफ़ अली रोड स्थित मुख्यालय से संचालित AIMTC कोई साधारण मंच नहीं, बल्कि पूरे मुल्क की 3,500 से अधिक जिला, तालुका और राज्य स्तरीय ट्रांसपोर्ट यूनियनों का सर्वोच्च शिखर संगठन है। इसके आंकड़ों की ताकत सीधे व्यवस्था पर असर दिखाती है:
​95 लाख से ज्यादा ट्रक और भारी मालवाहक गाड़ियां।
​50 लाख से अधिक बस और टूरिस्ट कमर्शियल वाहन।
​20 करोड़ से ज्यादा लोग—चाहे वे मालिक हों, चालक हों, मैकेनिक हों या पल्लेदार—प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस विशाल तंत्र पर निर्भर हैं।
​देश के किसी भी कोने में सब्जी, दूध, दवाइयां, खाद्यान्न या कारखानों का कच्चा माल समय पर पहुंचे, यह इसी ट्रांसपोर्ट बिरादरी के पसीने की बदौलत मुमकिन होता है।


​1936 लाहौर से उठी आवाज, आज गैर-राजनीतिक सर्वोच्च ढाल
​इस संगठन का इतिहास संघर्ष और एकता की अनूठी मिसाल है। जुलाई 1936 में अविभाजित भारत के लाहौर में ‘एसोसिएशन इंडिया मोटर यूनियन कांग्रेस’ के रूप में इसकी नींव रखी गई थी। वक्त की जरूरतों को देखते हुए 1968 में इसे पुनर्गठित कर पूरी तरह गैर-राजनीतिक और गैर-लाभकारी स्वरूप दिया गया। किसी भी सियासी पार्टी के झंडे तले न झुकते हुए, यह संस्था सिर्फ और सिर्फ ट्रांसपोर्टर्स और ड्राइवरों के हकों की रक्षा के लिए मैदान में डटी रहती है।


​नीतिगत जंग हो या सड़कों की समस्याएं, सरकार के सामने सबसे मजबूत पैरवी
​डीजल की आसमान छूती दरें हों, नेशनल हाईवे पर टोल प्लाजा की मनमानी, ई-वे बिल की तकनीकी पेचीदगियां, बॉर्डर चेकपोस्टों पर चालकों का उत्पीड़न या फिर मोटर वाहन कानूनों के कड़े प्रावधान—जब भी ट्रांसपोर्टरों पर कोई दबाव बनता है, AIMTC केंद्र और राज्य सरकारों के साथ सीधी टेबल-टॉक कर नीतिगत फैसले कराती है। देश के करोड़ों ऑपरेटरों और लाखों ड्राइवरों के आत्मसम्मान और रोटी की हिफाजत के लिए यह मंच हमेशा पहली कतार में खड़ा मिलता है।


​सड़क परिवहन से जुड़ी हर नीतिगत हलचल, ट्रांसपोर्टरों के हकों की जंग और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष खबरें सबसे पहले जानने के लिए पंजाब दस्तक चैनल को तुरंत फॉलो करें, शेयर करें और सब्सक्राइब करें।
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