सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक (शिमला)
राजधानी शिमला में 24 अगस्त 2026 को हिमाचल प्रदेश महासंघ समिति की एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। समिति के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली, कर्मचारियों, पेंशनरों और विभिन्न बोर्ड-निगमों के लंबित वित्तीय व नीतिगत मामलों को लेकर तीखा रोष व्यक्त किया गया।
बैठक में महामंत्री इंद्रपाल शर्मा, अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा सहित समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी और शहरी इकाइयों के प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
स्व. वीरभद्र सिंह की प्रतिमा पर माथा टेक लिया आशीर्वाद
समीक्षा बैठक संपन्न होने के उपरांत महासंघ समिति के समस्त पदाधिकारी व कार्यकारिणी सदस्य शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पहुंचे। वहां उन्होंने हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के समक्ष शीश नवाया, पुष्पांजलि अर्पित कर उनका आशीर्वाद लिया और कर्मचारियों व पेंशनरों के हकों की इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

13 मई 2026 के वादों पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप
बैठक को संबोधित करते हुए समिति के पदाधिकारियों ने सीधा आरोप लगाया कि माननीय मुख्यमंत्री ने 13 मई 2026 (13/5/2026) को कर्मचारियों और समिति के साथ जो वादे किए थे, सरकार अब उनसे साफ मुकर रही है और यह सीधे तौर पर वादाखिलाफी है।
पदाधिकारियों ने कड़े शब्दों में कहा:
’मुख्यमंत्री की आवाज, भगवान की आवाज’: लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रदेश के मुखिया का पद सर्वोच्च होता है। मुख्यमंत्री की आवाज भगवान और अबोध बच्चे की वाणी की तरह निष्छल और अटल मानी जाती है।
’पत्थर पर लकीर’: प्रदेश के सर्वोच्च पद पर बैठे मुख्यमंत्री की बात अंतिम होती है—यानी जो बात उनके मुख से निकल जाए, वह पत्थर पर लकीर के समान होनी चाहिए।
विश्वास पर कुठाराघात: जब कर्मचारी और जनता मुख्यमंत्री के सर्वोच्च पद पर पूरा भरोसा करते हैं, तो फिर खुद मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासनों पर अमल क्यों नहीं हो रहा?
कॉरपोरेट सेक्टर, बोर्ड-निगमों, लोकल बॉडीज और पेंशनरों की प्रमुख मांगें:
15% महंगाई भत्ता/राहत और 166 महीने का बकाया एरियर: कर्मचारियों व पेंशनरों को 15% महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) की बकाया किस्तें तुरंत जारी की जाएं। साथ ही, 166 महीने का लंबित बकाया एरियर अविलंब खातों में डाला जाए और सभी विभागाध्यक्षों के पास लंबित कर्मचारियों व पेंशनरों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों (Medical Reimbursement Bills) का तुरंत भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मियों का दर्द: 01/01/2016 से 31/01/2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों का संशोधित वेतनमान, पेंशन एरियर, ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और कम्यूटेशन का संपूर्ण बकाया तुरंत जारी किया जाए।
कॉरपोरेट सेक्टर की 22/10/1999 की अधिसूचना बहाल हो: एचपी कॉरपोरेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए 22/10/1999 की अधिसूचना को तुरंत बहाल किया जाए, जिसे 2004 में निरस्त (Repeal) कर दिया गया था। इससे 18 बोर्डों और कॉरपोरेशनों के कर्मचारियों को पेंशन का सीधा लाभ मिल सकेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री अलग से विशेष बैठक बुलाकर स्थायी समाधान निकालें।
अर्बन लोकल Bodyज में पेंशन व HPMC एक्ट का क्रियान्वयन: हिमाचल प्रदेश अर्बन लोकल बॉडीज (शहरी स्थानीय निकायों) के सभी पेंशनरों को 01/01/2016 से संशोधित वेतनमान के हिसाब से पेंशन लागू की जाए। साथ ही, हिमाचल प्रदेश एचपीएमसी एक्ट एंड रूल्स 1994 और 2006 को लोकल बॉडीज में पूर्ण रूप से इंप्लीमेंट किया जाए।
HRTC कर्मियों व 70 पार बुजुर्गों को राहत: एचआरटीसी कर्मियों को 01/01/2016 के आधार पर 50,000 रुपये की किस्त दी जाए और 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों का पूरा बकाया एरियर एकमुश्त मिले।
बिजली बोर्ड में OPS और एरियर: हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL) में पुरानी पेंशन योजना (OPS) तुरंत लागू की जाए। साथ ही, फरवरी 2022 से मई 2023 तक का बकाया एरियर और 2016 से पहले के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सभी देय लाभ दिए जाएं।
लाइफ सर्टिफिकेट व जेसीसी बैठक: डायरेक्टरेट ट्रेजरी एंड अकाउंट्स के पत्र संख्या 1/7/2026 में संशोधन कर पेंशनरों के लिए लाइफ सर्टिफिकेट का ऑनलाइन मोड जारी रखा जाए। सरकार को बने साढ़े तीन साल बीतने के बाद भी जेसीसी की बैठक न बुलाना दुर्भाग्यपूर्ण है; इसे तुरंत बुलाया जाए।
1 सितंबर को विधानसभा घेराव और चौड़ा मैदान में महारैली का आह्वान
अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा ने प्रदेश के समस्त कर्मचारी, पेंशनर और 18 बोर्ड-निगमों के संगठनों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान 1 सितंबर 2026 को शिमला के चौड़ा मैदान में विशाल धरना-प्रदर्शन व विधानसभा घेराव किया जाएगा। उन्होंने सभी कर्मचारियों व पेंशनरों से सपरिवार चौड़ा मैदान पहुंचने का आह्वान किया।
’सरकार के पिट्ठू बन आंदोलन फेल करने वाले स्वयंभू नेता परमात्मा से डरें’
नेताओं ने आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रचने वालों को सीधे तौर पर चेताते हुए कहा कि सरकार के कुछ पिट्ठू और तथाकथित स्वयंभू नेता इस ऐतिहासिक रैली को फेल करने के नापाक षड्यंत्र में लगे हुए हैं। ये लोग कभी प्रेस रूम तो कभी लोअर बाजार में खड़े होकर अखबारों में बयानबाजी कर खुद को नेता साबित करने का ढोंग रच रहे हैं।
वक्ताओं ने बेहद कड़े और भावुक शब्दों में कहा कि जीवन के इस अंतिम पड़ाव में भी ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए कि वे अपने ही बुजुर्ग साथियों और पेंशनरों के हकों की राह में रोड़ा अटका रहे हैं। उम्र का यह दौर आपसी खींचतान, राजनीति या एक-दूसरे को नीचा दिखाने का नहीं है। इन स्वयंभू नेताओं को बखूबी मालूम है कि कर्मचारियों का असल वजूद और ताकत क्या है। वे उस परमात्मा से डरें और अपने पुराने साथियों के हकों पर डाका डालने का काम बंद करें।
यदि इनमें जरा भी गैरत और कर्मचारी हितैषी होने का दम बाकी है, तो सरकार की दलाली और पर्दे के पीछे से चालें चलने के बजाय 1 सितंबर को चौड़ा मैदान में हजारों कर्मचारियों के सामने आकर खड़े हों। शिमला की पावन धरती पर कर्मचारियों और पेंशनरों की ऐतिहासिक एकजुटता इन सरकारी पिट्ठुओं की हर साजिश को पूरी तरह बेनकाब कर मुंहतोड़ जवाब देगी।
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