चौड़ा मैदान, शिमला (विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा, पंजाब दस्तक):
राजधानी शिमला का चौड़ा मैदान आज केवल नारों से ही नहीं गूंजा, बल्कि वहां हजारों गरीब परिवारों की बेबसी और छलकते आंसुओं ने सत्ता के गलियारों को हिला कर रख दिया। विधानसभा से चंद कदमों की दूरी पर ऑल हिमाचल टैक्सी ऑपरेटर यूनियन के बैनर तले जुटे हजारों चालकों ने प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया। धरने के दौरान जब यूनियन प्रधान और बुजुर्ग चालकों ने अपना दुखड़ा सुनाया, तो बोलते-बोलते उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
”हम भी बाल-बच्चे पालते हैं, हमारे पेट पर लात क्यों?”
धरने पर बैठे टैक्सी चालकों ने सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल दागते हुए कहा कि सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की बात करती है, लेकिन यह कैसा परिवर्तन है जो सीधे गरीबों के चूल्हे बुझाने पर तुला है?
टैक्स का दोहरा बोझ: चालकों ने भावुक होकर कहा, “हम नई गाड़ी खरीदते ही पूरे एक साल का टैक्स एडवांस भरते हैं, सरकार का खजाना भरते हैं। फिर भी हमारे बच्चों के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ क्यों? क्या हमारे बच्चों को जीने का हक नहीं है?”
नियमों का दोहरा मापदंड: जब राज्य में बसें, ट्रक और ऑटो 21 साल तक सड़कों पर दौड़ सकते हैं, तो केवल हिमाचल के टैक्सी ऑपरेटरों पर ही 12 साल की पाबंदी लगाकर उन्हें बर्बादी की कगार पर क्यों धकेला जा रहा है?
गगनभेदी नारों से थर्राई राजधानी
चौड़ा मैदान में जुटे चालकों का आक्रोश इन नारों के रूप में गूंज उठा:
”बस कितने साल चलेगी? 21 साल! ट्रक कितने साल चलेगा? 21 साल! ऑटो कितने साल चलेगा? 21 साल!”
”हिमाचल की टैक्सी कितने साल चलेगी? 12 साल, 12 साल!”
”मुख्यमंत्री जी की राजनीति कितने साल चलेगी? एक साल! सुक्खू जी की सरकार कितने साल चलेगी? एक साल!”
”सुक्खू सरकार होश में आओ, होश में आओ!”
”वंदे मातरम! वंदे मातरम!”
विधायक सुधीर शर्मा और आशीष शर्मा ने थामा हाथ
गरीब चालकों के इस बड़े आंदोलन को बल देने के लिए धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा और हमीरपुर सदर के विधायक आशीष शर्मा विशेष रूप से चौड़ा मैदान पहुंचे और चालकों के दर्द को साझा किया।
सदन में गूंजेगा ऑपरेटरों का हक: विधायक सुधीर शर्मा ने दो टूक कहा कि वे इस गंभीर मुद्दे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री से विस्तृत चर्चा करेंगे और विधानसभा के भीतर सरकार के इस फैसले के खिलाफ पूरी ताकत से मोर्चा खोलेंगे।
हमीरपुर सदर विधायक आशीष शर्मा का साथ: विधायक आशीष शर्मा ने प्रदर्शनकारियों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि गरीब चालकों और उनके परिवारों के साथ किसी भी सूरत में अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
कर्ज के दलदल में धंसता भविष्य
पहाड़ी राज्य हिमाचल में टैक्सी केवल एक वाहन नहीं, बल्कि हजारों बेरोजगार युवाओं और गरीब परिवारों की रोजी-रोटी का एकमात्र सहारा है। 12 साल की सख्त समयसीमा का मतलब है कि एक गाड़ी का कर्ज उतरते ही चालक को दूसरी गाड़ी के लिए नया कर्ज लेना पड़ता है। यूनियन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक सरकार इस 12 साल की पाबंदी को खत्म कर राहत नहीं देती, यह जन-आंदोलन पूरे प्रदेश में और उग्र होगा।
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