हिमाचल में आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन और नौकरी सुरक्षा की मांग

सड़कों पर आउटसोर्स कर्मचारी: 15–20 साल की सेवा के बाद भी नौकरी पर लटकी तलवार, ‘समान काम-समान वेतन’ और 58 साल तक सुरक्षा की मांग को लेकर भरी हुंकार

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​सुरेंद्र राणा, पंजाब दस्तक, चौड़ा मैदान
​प्रदेश भर के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारियों का सब्र आखिरकार टूट गया है। अपनी मांगों को लेकर कर्मचारियों ने राजधानी में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस विशाल प्रदर्शन में बागवानी, बिजली बोर्ड, जल शक्ति (IPH) समेत कई प्रमुख विभागों के आउटसोर्स कर्मचारी लामबंद होकर पहुंचे और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।


​15–20 साल की सेवा के बाद भी नौकरी पर संकट
​प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का दर्द है कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से लगातार विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इतने लंबे सेवाकाल के बावजूद न तो उन्हें नौकरी में कोई सुरक्षा दी गई है और न ही उचित वेतन मिल रहा है। हाल ही में विभिन्न विभागों से आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाए जाने के मामलों ने कर्मचारियों में भारी रोष और डर का माहौल पैदा कर दिया है।


​”15-20 साल काम करने के बाद भी हमारे पास जॉब सिक्योरिटी नहीं है। हॉर्टिकल्चर, बिजली बोर्ड और जल शक्ति विभाग से 15-15 साल से काम कर रहे साथियों को अचानक बाहर कर दिया गया। हमारी स्पष्ट मांग है कि 58 साल तक हर कर्मचारी की नौकरी सुरक्षित हो और समान काम के बदले समान वेतन मिले।”


अश्विनी शर्मा, संयोजक (आउटसोर्स कर्मचारी संघ)
​कर्मचारियों की मुख्य मांगें:
​58 साल तक सेवा सुरक्षा: सभी आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी 58 वर्ष की आयु तक पूरी तरह सुरक्षित की जाए।
​समान काम, समान वेतन: नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर आउटसोर्स कर्मियों को भी समान वेतन का अधिकार मिले।
​स्थायी नीति का निर्माण: कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार तत्काल प्रभाव से ठोस पॉलिसी बनाए।
​छंटनी पर रोक व बहाली: हाल ही में नौकरी से निकाले गए सभी कर्मचारियों को तुरंत बहाल किया जाए।


​चेतावनी: बात न बनी तो जिला स्तर पर होगा बड़ा आंदोलन
​प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों कर्मचारियों ने दोनों हाथ उठाकर एकजुटता का संकल्प लिया। कर्मचारी नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जब तक सरकार इन मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। यदि सरकार ने जल्द सुनवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को प्रदेश के हर जिले में ले जाया जाएगा।


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