सुरेंद्र राणा
शिमला:
हिमाचल प्रदेश के 17 निगमों और बोर्डों के हजारों बुजुर्ग पेंशनरों के हकों को लेकर आज शिमला में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में सालों से अपने जायज हक और पेंशन से वंचित चल रहे लगभग 6,342 बुजुर्गों की दयनीय स्थिति और उनके कानूनी अधिकारों पर विस्तृत व गंभीर रणनीति तैयार की गई। बैठक के बाद यह पूरी आधिकारिक जानकारी मीडिया प्रभारी सैन राम नेगी ने पंजाब दस्तक को विशेष रूप से साझा की।
एक झटके में छीना गया हजारों बुजुर्गों का सहारा
बैठक में इस बात पर गहरा रोष और चिंता व्यक्त की गई कि कर्मचारियों को हिमाचल प्रदेश सरकार की मूल अधिसूचना संख्या Fin.(IFC) 1-9/97 दिनांक 29 अक्टूबर 1999 के अनुसार सम्मानजनक पेंशन मिल रही थी। लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2 दिसंबर 2004 को एक आदेश जारी कर इस अधिसूचना को रिपील (रद्द) कर दिया। सरकार के इस एक फैसले ने हजारों बुजुर्गों को बुढ़ापे के इस पड़ाव पर बेसहारा छोड़ दिया। स्थिति यह है कि आज 17 निगम-बोर्डों के हजारों कर्मचारियों में से केवल नाममात्र 372 कर्मचारियों को ही 1999 की अधिसूचना के तहत पेंशन का लाभ मिल पा रहा है, जबकि 6,342 बुजुर्ग आज भी दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
वास्तविकता को देख माननीय मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने मामले की संवेदनशीलता, वास्तविकता और गंभीरता को देखते हुए यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि इस पूरे विषय को जल्द से जल्द माननीय मुख्यमंत्री महोदय के संज्ञान में लाया जाएगा। समिति मुख्यमंत्री जी से इस गंभीर विषय पर तत्काल एक विशेष बैठक बुलाने का पुरजोर आग्रह करेगी। हालांकि, संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा पेंशनरों की 14 प्रमुख मांगों में से 6 मांगों को पूरा करने पर संतोष प्रकट किया है, और उम्मीद जताई है कि इन शेष वित्तीय मांगों पर भी सरकार बिना देरी किए शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लेगी।
बैठक में जुटे प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारी
बुजुर्गों की इस आवाज को बुलंद करने के लिए आयोजित इस विशेष बैठक में:
देवीलाल ठाकुर, अध्यक्ष (हिमाचल प्रदेश कॉर्पोरेट सेक्टर)
भूपराम वर्मा, प्रांतीय महासचिव
नरेंद्र चौहान, उपाध्यक्ष (कॉर्पोरेट सेक्टर)
सफदर हुसैन, अतिरिक्त महासचिव
डी.आर. ठाकुर, वित्त सचिव
बुद्धिराम जस्ता, वरिष्ठ सलाहकार
सैन राम नेगी, मीडिया प्रभारी सहित कई वरिष्ठ सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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