पंजाब दस्तक ब्यूरो
धर्मशाला (ओमांश):
भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता एवं सुंदरनगर के विधायक राकेश जम्वाल ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की कार्यशैली ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कांग्रेस सरकार घोषणाएं करने में सबसे आगे और उन्हें धरातल पर उतारने में सबसे पीछे है। उन्होंने कहा कि सरकार की ‘मित्र नीति’ के कारण आज प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और कांग्रेस सरकार के मंत्री सिर्फ ‘स्टाम्प मंत्री’ बनकर रह गए हैं।
घोषणाएं बड़ी, धरातल पर सब फेल
राकेश जम्वाल ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के मंच से सरकारी स्कूलों में सीबीएससी (CBSC) लागू करने की बड़ी घोषणा कर प्रदेश में हजारों विद्यार्थियों और अभिभावकों को बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे। लेकिन लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदेश का एक भी सरकारी सीबीएससी स्कूल शुरू नहीं हो पाया है। सरकार की इस ढुलमुल नीति और लापरवाही के कारण अनेक विद्यार्थी या तो महंगे निजी स्कूलों में प्रवेश लेने को मजबूर हैं या फिर दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ा है और कई छात्रों का शैक्षणिक भविष्य असमंजस में फंस गया है।
”बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को राजनीतिक खींचतान और सत्ता के अहंकार की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता। अब स्वयं शिक्षा मंत्री यह स्वीकार कर रहे हैं कि मामला अभी भी निर्णय और नियुक्तियों के बीच अटका हुआ है। मुख्यमंत्री अपने पिटारे से सीबीएससी स्कूलों के शिक्षकों की फाइल कब निकालेंगे?”
राकेश जम्वाल, मुख्य प्रवक्ता व विधायक, भाजपा
शिक्षक न मिलने से छात्र पलायन को मजबूर
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि स्कूलों में शिक्षक न मिलने के कारण छात्र पलायन करने को विवश हैं। सरकार समय पर शिक्षक तक तैनात नहीं कर पाई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि घोषणाओं से शिक्षा व्यवस्था नहीं चलती, बल्कि इसके लिए समय पर सटीक निर्णय और प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत होती है। कांग्रेस सरकार की यह निष्क्रियता सीधे-सीधे प्रदेश के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
’स्टाम्प मंत्री’ बनकर रह गए कैबिनेट सहयोगी, एक व्यक्ति का शासन
जम्वाल ने सरकार के अंदरूनी तालमेल पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि विभाग ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है और अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री को ही लेना है। इससे साफ है कि प्रदेश के मंत्री अपने विवेक से कोई निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं। यदि मुख्यमंत्री को अपने ही मंत्रियों पर विश्वास नहीं है, तो फिर उन्हें मंत्री बनाने का औचित्य क्या है? कैबिनेट की महत्वपूर्ण उप-समिति (सब-कमेटी) केवल ‘आई वाश’ (आंखों में धूल झोंकने का प्रयास) साबित हुई है।
उन्होंने खुलासा किया कि चार मंत्रियों की इस महत्वपूर्ण बैठक में केवल दो ही मंत्री उपस्थित हुए, जबकि राजेश धर्माणी और जगत सिंह नेगी ने इसमें शामिल होना तक उचित नहीं समझा। यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के प्रति उनकी घोर उदासीनता को दर्शाता है। इससे स्पष्ट है कि अंतिम निर्णय किसी समिति की सिफारिशों पर नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री की ‘मित्र नीति’ के अनुसार ही होना है।
भाजपा देगी जन आंदोलन का रूप
राकेश जम्वाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार बार-बार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया का बहाना बना रही है, जबकि शिक्षा मंत्री खुद मान चुके हैं कि कई विषयों में चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। छात्रों का भविष्य फाइलों में कैद रहने के लिए नहीं बल्कि बेहतर शिक्षा पाने के लिए है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अब भी इस पर तुरंत निर्णय नहीं लिया, तो भारतीय जनता पार्टी इस गंभीर मुद्दे को लेकर पूरे प्रदेश में एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा करने से पीछे नहीं हटेगी।
