शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धरमानी ने जेपी नड्डा से हिमाचल आपदा राहत के ₹1500 करोड़ पर सवाल उठाए।

हिमाचल को केंद्र की बेरुखी: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धरमानी ने नड्डा से पूछा- आपदा के ₹1500 करोड़ कहाँ हैं?

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सुरेंद्र राणा | ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक
​हिमाचल प्रदेश में केंद्र सरकार द्वारा की जा रही कथित उपेक्षा और झूठे दावों को लेकर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धरमानी ने मोर्चा खोल दिया है। हाल ही में आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में दोनों मंत्रियों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल के प्रति सौतेला व्यवहार अपना रही है।


​’फंडिंग के नाम पर झूठे दावे’
​शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धरमानी ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा प्रदेश के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शुमार हैं, ऐसे में उनसे राज्य की अपेक्षाएं अधिक हैं। मंत्रियों ने आरोप लगाया कि जेपी नड्डा ने प्रेस वार्ता में फंडिंग को लेकर जो दावे किए हैं, वे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।


​आर्थिक संकट और आरडीजी (RDG) का मुद्दा
​दोनों मंत्रियों ने जोर देकर कहा कि आज हिमाचल प्रदेश को केंद्र के उदार सहयोग की सख्त आवश्यकता है। विशेषकर ऐसे समय में जब राज्य भारी वित्तीय दबाव, पुनर्निर्माण की चुनौतियों और बढ़ती विकासात्मक जरूरतों का सामना कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के बंद होने पर चिंता जताई, जो संविधान के अनुच्छेद 275 (1) के तहत हिमाचल के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता तंत्र रहा है। मंत्रियों ने कहा कि आरडीजी बंद होने से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग ₹8100 करोड़ का बड़ा नुकसान हो रहा है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में निवेश पर अतिरिक्त दबाव पड़ना निश्चित है।


​आंकड़ों की जुबानी: ₹1500 करोड़ का पता नहीं, सिर्फ ₹49 करोड़ मिले
​मंत्रियों ने आपदा प्रबंधन पर केंद्र के रवैये पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि 2023 की भीषण प्राकृतिक आपदा में हिमाचल के पुल, सड़कें, स्कूल और जलापूर्ति योजनाएं तबाह हो गईं। हजारों करोड़ का नुकसान हुआ, लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा घोषित ₹1500 करोड़ की सहायता राशि का अभी तक कोई अता-पता नहीं है।
​स्वास्थ्य क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए आयुष्मान भारत योजना में 90:10 की फंडिंग की बात की जाती है, लेकिन वर्ष 2025-26 में हिमाचल ने लगभग ₹155 करोड़ के स्वास्थ्य दावों का प्रस्ताव भेजा था, जिसके मुकाबले केंद्र से केवल ₹49 करोड़ ही प्राप्त हुए। यह भारी अंतर केंद्र के दावों की पोल खोल रहा है।


​’सुक्खू सरकार की सफलता से घबरा गई है भाजपा’
​रोहित ठाकुर और राजेश धरमानी ने कहा कि भाजपा नेतृत्व मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों से बौखला गया है। उन्हें डर है कि यदि सरकार इसी गति से काम करती रही, तो अगले 10 सालों तक भाजपा का सत्ता में आना नामुमकिन हो जाएगा। इसी घबराहट में भाजपा नेता बेबुनियाद और निरर्थक बयानबाजी कर रहे हैं।
​मंत्रियों ने नसीहत दी कि प्रदेश की जनता राजनीति से ऊपर उठकर विकास और ठोस उपलब्धियों पर चर्चा चाहती है। उन्होंने मांग की कि जेपी नड्डा केंद्र में अपनी प्रभावी भूमिका निभाएं और हिमाचल को उसका हक दिलवाएं।


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