मोहाली के Wave Estate सेक्टर 85 में अधूरे ड्रेनेज कार्य के कारण जलभराव का खतरा

एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: गमाडा की लापरवाही से Wave Estate (सेक्टर 85) के 1800 परिवारों के सिर पर मंडरा रहा ‘जल-प्रलय’ का खतरा, मानसून से पहले जागने का अल्टीमेटम

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​ब्यूरो रिपोर्ट:
सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक
​मोहाली
:
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य भर में विकास के नए आयाम स्थापित कर रही है, लेकिन गमाडा (GMADA) के कुछ अधिकारियों की कार्यशैली ने Wave Estate (सेक्टर 85) के 1800 परिवारों के लिए एक गंभीर संकट पैदा कर दिया है। मानसून की पहली भारी बारिश के साथ ही इन परिवारों के घरों और सड़कों पर आधा-आधा फुट पानी भरने का खतरा बढ़ गया है, जो एक बड़े जन-स्वास्थ्य संकट को निमंत्रण दे रहा है।


​सुग्गड़ गांव के पास पीपल के पेड़ के समीप ‘अधूरी योजना’ बनी मुसीबत
ग्राउंड जीरो सर्वे में खुलासा हुआ है कि सुग्गड़ गांव के पास, पीपल के पेड़ के समीप सेक्टर 85, 99 और 100 के चौराहे से थोड़ी दूरी पर मात्र 100 मीटर से भी कम दायरे में ड्रेनेज और सीवरेज पाइपलाइन का कार्य अधूरा छोड़ा गया है। हकीकत यह है कि रेलवे लाइन के पार 5-6 किलोमीटर तक का पूरा ड्रेनेज नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय है और पानी की निकासी बेहद तेज है। सरकार ने रेलवे लाइन के नीचे से जिस भव्य इंजीनियरिंग के साथ निकासी व्यवस्था की है, वह प्रशंसनीय है। लेकिन सुग्गड़ गांव के पास छोड़े गए इस छोटे से ‘कनेक्टिविटी गैप’ ने पूरी परियोजना के लाभ को शून्य कर दिया है।


​बरसात का ‘डबल संकट’: सीवरेज और बरसाती पानी का बैक-फ्लो
Wave Estate (सेक्टर 85) के निवासियों ने आरडब्ल्यूए की मदद से पूरी कॉलोनी के ड्रेनेज और सीवरेज चैंबर्स को मशीनों द्वारा पूरी तरह साफ करवा लिया है। लेकिन, आगे का निकासी मार्ग (Outfall) अधूरा होने के कारण, बरसात आते ही सारा बरसाती और सीवरेज का गंदा पानी वापस ‘बैक-फ्लो’ होकर Wave Estate की सड़कों पर भर जाएगा। अभी तेज गर्मी के कारण पानी जमीन में रिस रहा है, लेकिन मानसून की पहली भारी बारिश होते ही यह क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा।


​अधिकारियों की लापरवाही या बड़ी साज़िश?
यह सवाल अब हर निवासी की जुबान पर है: यदि यह जमीन अधिग्रहित नहीं थी, तो रेलवे लाइन के आगे का प्रोजेक्ट कैसे स्वीकृत हुआ? ड्रेनेज सिस्टम में इस तरह का ‘गैप’ इंजीनियरिंग के नियमों के विरुद्ध है और यह किसी अधिकारी की घोर लापरवाही है। सरकारी खजाने से करोड़ों खर्च हुए, लेकिन केवल 100 मीटर के गैप से पूरी व्यवस्था फेल है। मौके का जिम्मेदार जेई, एसडीओ और एक्सईएन कौन है? जिसने भी यह लापरवाही की है, उस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।


​प्रशासन को सीधी चेतावनी: अब नहीं तो कभी नहीं
गमाडा प्रशासन को पत्र सौंपकर मांग की गई है कि बरसात शुरू होने से पहले इस अधूरे हिस्से को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए। सरकार जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर है, लेकिन अधिकारियों का यह रवैया सरकार की छवि को दागदार कर रहा है। यदि बरसात से पहले यह कार्य पूरा नहीं हुआ, तो यह मामला सीधे विजिलेंस (Vigilance) और लोकपाल के पास जाएगा ताकि जन-स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके।

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