रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक
शिमला: हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) के चीफ इंजीनियर विमल नेगी मामले में सीबीआई द्वारा शिमला की विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट ने प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि विमल नेगी को अधिकारियों द्वारा न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि उन्हें अपमानित करने के लिए “तुम गधे हो” जैसे शब्दों का प्रयोग भी किया गया।
साजिश का मुख्य सूत्रधार: एमडी हरीकेश मीणा
सीबीआई की चार्जशीट में तत्कालीन एमडी हरीकेश मीणा को इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार बताया गया है। जांच में सामने आया है कि इस पूरी प्रताड़ना के पीछे ऊना जिले में चल रही 32 मेगावाट की ‘पेखू बेला’ (Pekhu Bela) जल विद्युत परियोजना (लागत 220 करोड़ रुपये) का बड़ा खेल था। एमडी मीणा चाहते थे कि काम अधूरा होने के बावजूद ठेकेदार को 16.29 करोड़ रुपये की पेमेंट जारी की जाए।
कैसे रची गई साजिश?
सीबीआई के खुलासे के अनुसार:
भुगतान रोकने की कोशिश: तत्कालीन जीएम महेंद्र कुमार चोपड़ा ने नियमों का हवाला देते हुए इस अनियमित भुगतान को रोकने की पुरजोर कोशिश की थी।
अधिकारियों को हटाना: सीबीआई का कहना है कि जब महेंद्र कुमार चोपड़ा ने नियमों की अनदेखी करने से इनकार किया, तो एमडी मीणा ने उन्हें पद से हटा दिया। इसके बाद ही विमल नेगी की वहां तैनाती की गई ताकि अपने अनुचित आदेशों को पूरा करवाया जा सके।
प्रताड़ना और दबाव: विमल नेगी पर भी इसी पेमेंट को पास करने का अनुचित दबाव बनाया गया और इनकार करने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया, जिसके चलते उन्होंने अपना जीवन समाप्त कर लिया।
चार्जशीट में अन्य आरोपी
चार्जशीट में एमडी हरीकेश मीणा के अलावा निदेशक देशराज पर भी प्रताड़ना के गंभीर आरोप हैं। साथ ही, मामले में एएसआई पंकज शर्मा को भी नामजद किया गया है, जिन पर साजिश से जुड़े सबूतों को नष्ट करने का गंभीर आरोप है। यह चार्जशीट सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और वीआईपी संस्कृति के काले चेहरे को उजागर करती है।
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