By Surender Rana हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का असर केवल आम उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव राज्य की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था, परिवहन व्यवस्था, बागवानी क्षेत्र और सरकारी विकास परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है। पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल की अधिकांश आर्थिक गतिविधियां सड़क परिवहन पर निर्भर हैं। ऐसे में ईंधन महंगा होने से हर क्षेत्र में लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यह जानकारी पंजाबदस्तक की विशेष रिपोर्ट में सामने आई है।
पर्यटन पैकेज हो सकते हैं महंगे
प्रदेश में आने वाले अधिकांश पर्यटक निजी वाहनों, टैक्सियों और वोल्वो बसों के माध्यम से यात्रा करते हैं। डीजल की कीमत बढ़ने से टैक्सी यूनियनें और निजी बस ऑपरेटर किराए में वृद्धि कर सकते हैं। इसका सीधा असर पर्यटन पैकेजों पर पड़ेगा और बजट आधारित पर्यटन प्रभावित हो सकता है। फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश के चेयरमैन गजेंद्र चंद ठाकुर का कहना है कि लॉजिस्टिक्स और बिजली बैकअप के लिए जनरेटर संचालन का खर्च बढ़ने से होटल के कमरे और खान-पान की दरों में भी बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। पंजाबदस्तक के अनुसार, इससे पर्यटन कारोबार पर दबाव बढ़ सकता है।
फसलों और सब्जियों की लागत बढ़ने की आशंका
पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से सेब सहित अन्य फसलों और सब्जियों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जबकि किसानों की आमदनी प्रभावित होने की संभावना है। ईंधन मूल्य वृद्धि का सबसे बड़ा असर माल ढुलाई पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हिमाचल के दूरदराज क्षेत्रों तक खाद्य सामग्री, दूध, सब्जियां और दैनिक उपयोग का सामान ट्रकों और छोटे वाहनों से पहुंचता है। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टरों का परिचालन खर्च बढ़ेगा, जिसका असर बाजार कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
इसके अलावा सीमेंट, सरिया और अन्य निर्माण सामग्री की ढुलाई महंगी होने से निजी निर्माण कार्यों के साथ-साथ सरकारी परियोजनाओं की लागत भी बढ़ सकती है। पंजाबदस्तक की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे विकास कार्यों की गति पर भी असर पड़ सकता है।

पर्यटन सीजन में ईंधन और गैस सप्लाई सुनिश्चित करने की मांग
ऑल हिमाचल कमर्शियल व्हीकल्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी के चेयरमैन राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि तेल के दाम भले बढ़ाए गए हों, लेकिन सरकार को पर्यटन सीजन में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि पर्यटन कारोबार प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बड़ी आबादी की रोजी-रोटी पर्यटन उद्योग से जुड़ी हुई है।
राजेंद्र ठाकुर ने यह भी कहा कि हाल ही में रसोई गैस की किल्लत के कारण कई होटलों की बुकिंग तक रद्द करनी पड़ी थी। इसलिए ईंधन महंगा होने के बावजूद उसकी उपलब्धता बनाए रखना बेहद जरूरी है। पंजाबदस्तक के अनुसार, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार को समय रहते आवश्यक कदम उठाने होंगे।
