साइबर ठगों के निशाने पर हमीरपुर ठगे करोड़ो

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हमीरपुर, सुरेंद्र राणा: साइबर ठगों ने प्रदेश के सबसे साक्षर जिला में ठगी का ऐसा जाल बिछाया है कि आए दिन पढ़े-लिखे लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। इसे देखते हुए जिला पुलिस ने जहां इसके लिए स्पेशल सैल का गठन किया है, वहीं हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। जिला पुलिस के पास 2022 से लेकर अब तक अढ़ाई वर्षों में साइबर ठगी की ऑन रिकार्ड 654 शिकायतें पहुंची हैं, जबकि 102 करोड़ रुपए की ठगी इस समयावधि में यहां के लोगों से हो चुकी है। एसपी हमीरपुर भगत सिंह ठाकुर के अनुसार हमीरपुर जिला में इस वक्त ड्रग्स के अलावा साइबर ठगी बहुत बड़ा चैलेंज बन चुका है। लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए जिला पुलिस ने साइबर सैल का गठन किया है और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।

यदि कोई भी नागरिक ठगी का शिकार होता है, तो वह तुरंत टोल फ्री नंबर 1930 या फिर 01972-222053 पर कॉल कर सकता है, ताकि तुरंत एक्शन लिया जाए। अढ़ाई वर्षों में जो करोड़ों की ठगी हुई है उसमें से समय पर सूचना मिलने पर दस करोड़ 32 लाख 32 हजार 197 रुपए फ्रीज करने के माध्यम से ठगी का शिकार हुए लोगों को लौटाए भी गए। -एचडीएम

हर साल बढ़ रहे मामले

हमीरपुर में वर्ष 2022 में ठगी की ऑन रिकार्ड पॉर्टल पर 66 शिकायतें पुलिस के पास दर्ज हुई, इनमें आठ करोड़ की ठगी सामने आई। इस आठ करोड़ में से 60,32,197 रुपए फ्री करके लौटाए जा सके। 2023 में साइबर ठगी की शिकायतों का आंकड़ा 304 तक पहुंच गया और शातिरों ने 41 करोड़ की ठगी की। इसमें से तीन करोड़ 91 लाख फ्रीज किए जा सके। वहीं, वर्ष 2024 में अब तक 284 ठगी की शिकायतें पुलिस के पास पहुंच चुकी हैं और लोग 53 करोड़ गंवा चुके हैं। समय पर शिकायत मिलने से पांच करोड़ 81 लाख फ्री ज किए जा सके।

डीसीपी बताकर ठगे पांच लाख

एसपी हमीरपुर ने ताजा घटनाक्रम का जिक्र करते हुए बताया कि हमीरपुर के एक हाई प्रोफाइल व्यक्ति से ठगों ने पांच लाख रुपए ठग लिए। उस व्यक्ति को पैसे देने के लिए अपनी एफडी भी बीच में भी विदड्रा करवानी पड़ी। घटनाक्रम के अनुसार उस व्यक्ति को डीसीपी मुंबई के नाम से कॉल आई जिसमें नाम भी सही बताया गया। उसे कहा गया कि तुम्हारी जो ट्रांजेक्शन हो रही है उसमें आतंकी गतिविधि होने का अंदेशा है। उसे इस तरीके से धमकाया गया कि वो ट्रैप में फंस गया और पांच लाख रुपए गंवा बैठा।

हाई कोर्ट के प्रावधान के बाद मिली है राहत

एसपी के अनुसार पहले ऐसे मामलों को दर्ज करने की लंबी प्रक्रिया होती थी और पैसे मिलने के चांस न के बराबर होते थे, लेकिन जब से हाई कोर्ट ने इसमें विशेष प्रावधान किया है, तो साइबर फ्रॉॅड होने शिकायत मिलने पर तुरंत उसे अपलोड किया जाता है और जो पैसा है वो वहीं होल्ड हो जाता है। इससे पैसा आगे निकालने के चांस कम हो रहे हैं।

फ्रॉड के नए-नए तरीके

पुलिस की मानें तो साइबर फ्रॉड करने वालों ने ठगी के नए-नए तरीके इजाद कर लिए हैं। जैसे कोई खुद को पुलिस का बड़ा अधिकारी बताकर फोन करता है, कोई रिश्तेदार बनकर विदेश में फंसे होने की बात कहकर पैसे मांगता है, कोई बैंक डिटेल लेने के नाम पर, कोई नौकरी का झांसा देकर ठगी कर रहा है, कोई खुद को कस्टम ऑफिसर बताकर पैसों की डिमांड कर रहा है, तो कोई खुद को आशा वर्कर बताकर लाभार्थी को फोन पर बैंक की डिटेल मांगकर उसे ठगी का शिकार बना रहा है। इसके अलावा मेल और खासकर युवा हनी ट्रैप में फंसकर लाखों लुुटाने को मजबूर हो रहे हैं।

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