फिलिस्तीन पर इजरायल के हमले के विरोध में शिमला में सीपीआईएम का धरना प्रदर्शन

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शिमला, सुरेंद्र राणा: फिलिस्तीन और इजरायल के बीच चल रहे हमले के खिलाफ आज शिमला में उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। सीपीआईएम जिला सचिव संजय चौहान ने कहा कि पार्टी फिलीस्तीन की गाजा पट्टी में हमास और इजरायल के बीच हमलों व जवाबी हमलों की कड़ी निन्दा करती है तथा इस अमानवीय कार्यवाही पर तुरन्त रोक की पुरजोर मांग करती है।

संजय चौहान ने कहा कि प्रदर्शन के माध्यम मांग उठाई गई कि इस टकराव को तुरन्त बन्द किया जाना चाहिए। टकराव के चलते पिछली 14 दिनों से आ रही खबरों के अनुसार कुल 4900 के करीब लोगों की जान चली गई है और 13300 के करीब लोग घायल हुए हैं। गाजा में अब तक 3785 लोगों की मौत हुई है। इनमे 1524 बच्चे व 120 बुजुर्ग शामिल हैं। पहले ही इज़राइल फिलीस्तीन के बीच चल रहे टकराव में अनेकों जाने जा चुकी है और अब इस ताजा टकराव से हालत और बिगड़ गए हैं और अधिक मौते होंगी और तकलीफ पैदा होगी।

इज़राइल गाजा में नाकाबंदी कर दी गई है और अब हवाई हमलो के साथ जमीनी युद्ध की तैयारी भी कर रहा है। कई क्षेत्रो में पानी, बिजली, खाद्य वस्तुओं व अन्य मानवीय मदद रोक दी है जिससे गाजा के कई हिस्सों में मूलभूत आवश्यकताओं की भारी कमी हो गई है। इज़राइल की दक्षिणपंथी नेतन्याहू सरकार खुले तौर पर तेजी से फिलिस्तीनी जमीनों पर कब्जा कर रही है और पश्चिम तट पर यहूदी बस्तियां बसाने में लगी हुई है। इस वर्ष इस टकराव में अभी तक 248 फिलिस्तीनी मारे गए हैं जिनमे 40 बच्चे भी हैं।

येरूशलम से फिलिस्तीनी परिवारों को जोर जबरदस्ती से बेदखल किया जा रहा है। गाजा पट्टी जहां 23 लाख से अधिक फिलिस्तीनी रह रहे है पिछ्ले 16 वर्षो से इसकी बुरी तरह से इज़राइल द्वारा नाकेबंदी कर रखी है। जब भी इस नाकेबंदी का प्रतिरोध फिलिस्तीनी लोगों के द्वारा की जाती है है तो वहां हवाई बमबारी की जाती है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा फिलिस्तीनी लोगो को उनकी गृह भूमि के जायज़ अधिकार दिलवाने तथा फिलीस्तीनी जमीन पर से सभी इज़राइली बस्तियां व अवैध कब्जों को हटाना सुनिश्चित करना चाहिए।

इसके साथ ही दो राष्ट्र पर आधारित समाधान के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर अमल सुनिश्चित करना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र संघ व भारत सरकार सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय टकराव को रोकना सुनिश्चित करे और संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव को लागू कराने के लिए कदम उठाए।

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