जोशीमठ का खतरा अचानक नहीं आया, बहुत पहले ही मिली थी चेतावनी, एक्सपर्ट ने बताया- बचाने के लिए क्या करना होगा

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उतराखंड:1976 में जोशीमठ को लेकर एक रिपोर्ट आई थी जिसे मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है. सबसे पहली बार इस रिपोर्ट में जोशीमठ को संवेदनशील क्षेत्र बताया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक जोशीमठ शहर मलबे पर बसा हुआ है.

इसे ऐसे समझते हैं. सैकड़ों साल पहले पहाड़ पर कोई भूस्खलन या ऐसी कोई घटना हुई होगी जिसके बाद ऊपर से मिट्टी और पहाड़ खिसककर इस जगह जमा हुआ जहां आज जोशीमठ मौजूद है. धीरे-धीरे यह मजबूत होता गया और यहां बसावट होने लगी.

कमजोर जमीन पर बसा शहर

जोशीमठ जिस जमीन के ऊपर बसा है, वह ढीली और कमजोर है. इसके नीचे की जमीन में जो सामग्री है वह मिट्टी और मलबा है. यह भले ही मजबूत नजर आता हो लेकिन असल में दूसरे पहाड़ों की तरह इसकी पकड़ मजबूत नहीं है. यहां की मिट्टी के अध्ययन से पता चलता है इस जगह पर हजारों साल पहले कोई ग्लेशियर रहा होगा.

देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट के डॉ. मनीष मेहता ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा जोशीमठ को कत्यूरी राजवंश के काल में 11वीं और 12वीं शताब्दी में बसाया गया था. यह दो नालों, कंपनी नाला और सिंधधार नाला के बीच स्थित है. साथ ही उन्होंने कहा कि यह भूकंप संवेदनशील क्षेत्र में 5 में है.

डॉ मेहता कहते हैं कि जब हमारे हाथ से चीजें निकल जाती हैं तो हम कारणों और समाधान की बात करते हैं जबकि शुरुआती संकेत मिलते ही हमें कार्रवाई शुरू कर देनी चाहिए. जोशीमठ में दशकों पहले संकेत मिलने के बाद उनकी अनदेखी की गई और आज नतीजा सामने दिख रहा है.

जमीन से निकल रहा पानी

जोशीमठ के कुछ इलाकों से पानी निकल रहा है. स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि शहर के नीचे से एनटीपीसी सुरंगें बना रही है जिसमें आस-पास कहीं से दरार आ गई है और उसमें से पानी घुस रहा है. पानी के साथ मलबा बहने से नीचे जमीन में खाली जगह बन रही है और उससे जमीन धंस रही है. जोशीमठ के पास ही एनटीपीसी एक सुरंग बना रही है. स्थानीय लोग का दावा है कि इसके लिए अंदर विस्फोट किया जा रहा है जिसके चलते ये सब हो रहा है. हालांकि एनटीपीसी ने कहा है कि सुरंग बनाने में विस्फोट नहीं किया जा रहा है. मशीनों की मदद से ये किया जा रहा है.

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