खाद्य आपूर्ति विभाग में अनुबंध काल के वरिष्ठता लाभ वापस लेने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक

1 min read

शिमला, सुरेन्द्र राणा:हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने खाद्य आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों की अनुबंध काल की गणना के आधार पर वरिष्ठता लाभ वापस लेने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने 3 अप्रैल को अनुबंध काल के वरिष्ठता लाभ वापस लेने के आदेश जारी किए थे। इसी आदेश पर न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और रंजन शर्मा की खंडपीठ ने रोक लगाई है।

खंडपीठ ने कहा कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं को दी गई अंतरिम सुरक्षा उनके पक्ष में कोई इक्विटी या अन्य अधिकार नहीं देगी। अदालत ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए इस अर्जी पर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट में अनुबंध की सेवाकाल को वरिष्ठता एवं पदोन्नति के लिए गिने जाने वाले मामले लेखराज और अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश पर 25 अप्रैल को सुनवाई होगी। इसी के साथ इस अर्जी को भी लगाया गया है।

सरकार ने इसी साल 7 फरवरी को हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती और सेवा शर्तें अधिनियम 2024 को लागू किया है। इसके तहत जो भी वर्ष 2003 के बाद नौकरी में लगे हैं, उनके अनुबंध सेवाकाल को वरिष्ठता के लाभ के लिए नहीं गिना जाएगा। इसी कानून के खिलाफ लेखराज और एक अन्य मामले में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। सरकार की ओर से 1 मार्च को खाद्य आपूर्ति विभाग में अनुबंध काल के बाद पदोन्नति वाले आदेश जारी किए गए थे। याचिका के दायर होने के बाद इस आदेश को भी वापस ले लिया था।

रोक लगने से अन्य विभागों के कर्मियों में भी जगी आसप्रदेश के कई विभागों में भी बीते दिनों अनुबंध काल के सेवाकाल की गणना के आधार पर तय पदोन्नति और वरिष्ठता लाभ वापस ले लिया था। अब खाद्य आपूर्ति विभाग के मामले में हाईकोर्ट से लगी रोक के बाद अन्य विभागों के कर्मियों को भी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

कर्मचारी संघ के कर्मचारियों के तबादले पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बद्दी में जीएमपी टेक्निकल सॉल्यूशंस मेंं कार्यरत कर्मचारियों के स्थानांतरण पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने 21 अप्रैल तक सभी वादियों और प्रतिवादियों को अपने-अपने उत्तर और प्रति उत्तर दायर करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी। प्रदेश हाईकोर्ट में जीएमपी टेक्निकल सॉल्यूशंस कर्मचारी संघ की ओर से याचिका दायर की गई है। संघ की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि यूनियन की ओर से 3 मार्च को लेबर अधिकारी को मांगों को लेकर एक डिमांड नोटिस दिया गया। उसके बाद पहले करीब 100 कर्मचारियों का तबादला दूसरे राज्यों में किया गया। फिर 7 मार्च को 85 और कर्मचारियों का स्थानांतरण किया गया। इसी को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours