शिमला में हिमाचल और तेलंगाना सरकार के बीच लाहौल स्पीति में बनने वाले दो हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को लेकर MOU साइन

शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के आखरी दिन माननीयों के वेतन-भत्ते बढ़ाने के फैसले के बाद कर्मचारी वर्ग मुखर हो गया है और अपनी लंबित देनदारियों को जारी करने की मांग कर दी है। इसी को लेकर संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने शनिवार को प्रदेश की राजधानी शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उनका कहना है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति ठीक हैं।संयुक्त कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि बीते कल हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र खत्म हो गया है। बजट सत्र के आखरी दिन माननीयों के वेतन व भत्तो में बढ़ोतरी की है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार विधायकों और मंत्रियों की सैलरी में 24 से 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। ऐसे में जब नोटिफिकेशन आएगी एक्ज़ेक्ट फिगर उसी से सामने आएगी। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान कई विधायकों ने कहा कि महंगाई बढ़ गयी है 9 सालो से उनकी सेलरी नही बढ़ी है।ऐसे में उनकी सेलरी बढ़नी चाहिए और सभी ने उनका समर्थन भी किया।वीरेंद्र चौहान ने कहा कि यह बात सत्य है कि मंहगाई सभी के लिए बढ़ी है। ऐसे में अन्य वर्गों का भी सरकार को ध्यान रखना चाइए, कर्मचारियों के लिए भी महंगाई बढ़ी है, लेकिन बजट सत्र में उनकी मांगों पर कोई चर्चा नहीं हुई।चौहान ने बताया कि कर्मचारियों के वेतन में 2006 के बाद 2016 में वृद्धि होनी चाहिए थी, लेकिन यह 2022 में की गई। 16 साल बाद भी सिर्फ वेतन में वृद्धि हुई, भत्तों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।

पहले प्रदेश में पंजाब की तर्ज पर पे-कमीशन मिलता था, लेकिन 2022 में केंद्र की तर्ज पर वेतन दिया गया, जिससे हिमाचल के कर्मचारी पंजाब की तुलना में पिछड़ गए हैं। महासंघ के अध्यक्ष ने कहा कि 2023 से कर्मचारियों की DA की चार किश्तें और महंगाई भत्ते का एरियर लंबित है। ऐसे में कर्मचारियों की निगाहें भी अब सरकार पर टिकी हुई हैं। सरकार कर्मचारियों के DA एरियर को भी जारी करें।उन्होंने कहा कि प्रदेश के एक कर्मचारी का कम से कम 5 लाख व उससे ज्यादा देनदारियां पेंडिंग है। सरकार उसको जल्द जारी करें। उन्होंने बताया कि सात अप्रैल को कर्मचारियों का सम्मेलन होगा जिसमें आगामी रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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