शिमला, सुरेन्द्र राणा : नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में अपराध बेकाबू हो चुका है। पुलिस अपराध नियंत्रण के अलावा सारे काम कर रही है। अपने राजनैतिक आकाओं के लिए उलटे सीधे काम कर रही है। सरकार ने प्रदेश के लोगों की सुरक्षा को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। मेरा मुख्यमंत्री से निवेदन करता हूं कि पुलिस को प्रदेश की सुरक्षा के काम में लगाए विपक्षियों की सीआईडी करवाने के लिए नहीं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि जब विमल नेगी गायब हुए तो इतने बड़े अधिकारी की खोज में पुलिस ने पहले कोई रुचि नहीं दिखाई। परिजनों को बार-बार मुख्यमंत्री से मिलकर खोज अभियान में तेजी लाने की गुहार लगानी पड़ी । थक हार कर परिजनों ने ख़ुद उनका सुराग देने वालों पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित करना पड़ा।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हैरानी भरी बात यह है कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार विमल नेगी की मृत्यु उनके शव मिलने के पांच दिन पहले हुई थी। जबकि वह 9 दिन से गायब थे। तो वह तीन से चार दिन कहां थे? पुलिस उन्हें चार दिनों में क्यों नहीं ढूंढ पाई। इस मामले में साज़िश के तार बहुत गहरे हैं। इसलिए हर सवाल के जवाब मिलने चाहिए। जो उंगलियां प्रदेश की सत्ता और तंत्र पत्र उठ रही हैं, उनका जवाब मिल सकें। इसलिए सरकार सीबीआई की जांच करवा के दूध का दूध और पानी का पानी करे।
14 लोगों की नशे की ओवरडोज से मौत
जयराम ठाकुर ने कहा कि न प्रदेश सरकार के हालात सही है और न ही कानून व्यवस्था का। नए साल में 21 से ज्यादा लोगों की बर्बर तरीके से हत्या हो हुई है। नए साल के अंदर 14 लोगों की नशे के ओवर डोज से मौत हो गई है। सरकार सदन में कहती है कि नशे के मामले में बीस प्रतिशत की कमी हो रही है, तीस प्रतिशत की कमी कर दी है। सरकार इस तरह के आंकड़े कहां से ला रही है। इस तरह के झूठ से सरकार नशे के तांडव को सिर्फ छुपाने का काम कर रही है। जिसके परिणाम बहुत बुरे होंगे। सरकार इस तरह से पर्दा डालकर प्रदेश को नशे के तांडव से नहीं बचा सकती है। सरकार से हम बार बार कह रहे हैं कि हम आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर आपके साथ खड़े हैं, इसलिए वह नशे के ख़िलाफ़ सख्त से सख्त कदम उठाए जिससे नशे के प्रकोप से प्रदेश को बचाया जा सके।
दो साल में 180 से अधिक मर्डर
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि दो साल के कार्यकाल में 180 से ज्यादा हत्याएं हो चुकी हैं। 600 से ज्यादा दुराचार और दो हज़ार से ज्यादा चोरियां हो चुकी हैं। इसके बाद भी सरकार कह रही है सब सही है। मंडी में एक ढाबा संचालक से डकैती हुई और उसे गोली मार दी गई। पीड़ित का कहना है कि पौना घंटे तक पुलिस ने फ़ोन नहीं उठता और जब फ़ोन उठाया और जिस तरह की बातें हुई, बहुत दुखद है। सब मीडिया के माध्यम से बाहर आई हैं। अभी तक उन युवाओं को पकड़ा नहीं जा सका। क्योंकि पुलिस ने समय से कार्रवाई ही शुरू नहीं की। बीती रात मंडी में शराब के माफिया ने पुलिस पर दराट से हमला किया। उन्हें पिस्टल दिखा कर धमकाते हैं। बीती रात ही सुंदरनगर में युवाओं का एक जत्था खालिस्तान के नारे लगाकर गुजरा। प्रतिबंधित झंडे और बिना नंबर प्लेट की गाड़ियां तलवार लिए युवा प्रदेश के ढाई सौ किलोमीटर अंदर कैसे पहुंच जाते हैं? उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती हैं?
पुलिस को सख्त से सख्त कार्रवाई करनी होगी
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार की इस खुली छूट की वजह से आज दो प्रदेश के लोगों का जीवन संकट में आ गया है। आखिर पुलिस कहां है? दो हफ्ते पहले वन माफिया ने कशमल की तस्करी से रोकने पर वन रक्षक और चौकीदार को अपनी गाड़ी में घसीटकर ले गया। आख़िर ऐसे लोगों को हिम्मत कहां से मिलती है? आख़िर उन्हें संरक्षण कौन देता है? मुख्यमंत्री कहते हैं कि हिमाचल में आकर हुड़दंग करो पुलिस आपको होटल छोड़कर आएगी। इसका क्या संदेश लोगों में जाएगा? ऐसे बयान का परिणाम इस तरह की अराजकता है जिसे पूरा प्रदेश भुगत रहा है। जिस तरह से अपराध बेकाबू हो रहे हैं और पुलिस द्वारा अपराधियों के प्रति नरमी बरत रही है, उससे मैं दावे के साथ कहता हूं कि यह सिलसिला यही रुकने वाला नहीं है। पुलिस को सख्त से सख्त कार्रवाई करनी होगी। जिससे अपराधियों में ख़ौफ़ पैदा हो सके।
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